पथ में शूल बहुत हैं

Leave a comment

एन.एस.एस बिट्स पिलानी द्वारा आयोजित जूनून, मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रभावित बच्चों के लिए एक खेल प्रतिस्पर्धा है जो हर वर्ष बिट्स पिलानी में आयोजित की जाती है| गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुझे मौका मिला इन छात्रों के लिए एक कविता लिखने का| यह कविता दरअसल उस हर व्यक्ति के लिए है जो जीवन की परिस्थितियों से घबराकर एक कदम पीछे हटने की सोचता है और इस कविता की हर पंक्ति आपको हर कठिनाई का सामना करने के लिए प्रेरित करेगी|

उलझन, पीड़, उदासी, हो तो हो,
वीणा की धुन सब बासी, हो तो हो,
पर संग इनके उम्मीदों के फूल बहुत हैं,
मत कहना कि पथ में शूल बहुत हैं।
 
इस पथ की चुनौती को तू कर नमन,
मंज़िल की चाहत में झोंक दे अपना तन-मन,
ये युद्ध है और तू वीर है,
यह चीख रहा है धरती का कण-कण। 
यहाँ न छाँव है, न आराम है
और  रक्त, स्वेद, धूल बहुत है,
पर मत कहना कि पथ में शूल बहुत हैं।
 
कोई भी आशा सन्देश न देंगे ये तारे,
न बढ़ पायेगा तू हमेशा दूजों के सहारे,
बन खुद की लाठी, बन खुद ही तलवार तू,
चला-चल तू उस ओर, जहाँ तुझको शौर्य पुकारे। 
राहें हैं लम्बी और मुस्कानें कुछ कम हैं,
और स्वाधीनता की राह के उसूल बहुत हैं,
पर मत कहना कि पथ में शूल बहुत हैं। 
 
जीत पर हो जाए किसी का अधिकार जैसे,
बादलों से बरस रहा हो संसार का प्यार जैसे,
यहाँ सब हैं आज तेरी त्रुटि छिपाने,
मूरत बनाने वाला कोई शिल्पकार जैसे। 
अंधेरा, अत्याचार, दुत्कार है यहाँ लेकिन,
संग इनके यकीनन रसूल बहुत हैं,
मत कहना कि पथ में शूल बहुत हैं।।

शूल: thorns
स्वेद: sweat
शौर्य: gallantry
स्वाधीनता: independence
त्रुटि: fault
रसूल: messiah

-अर्चित अग्रवाल
Advertisements

जूनून

Leave a comment

है सलाम अटल निश्चय को,
मन मौजी तरंगी खून को,
तेरी निश्छल मुस्कान को,
सलाम है तेरे जूनून को।

रात भर की बरखा पर भी,
सूखी मिली जब ज़मीन उन्हें,
कोसा न किसी गैर को,
जो मिली चुनौती नवीन उन्हें
किया तकदीर पर प्रहार फिर,
बारूदी वादी में हुआ जुगनू तैयार फिर
ऐ अटल दुर्दम्य पिता,
जननी लवलीन अपराजिता
सलाम है तेरे जूनून को।

बचकानी सब हरकत पर यकीनन,
सहा तूने है उपहास बड़ा,
ख़ुशबख्त है सभी आज,
देख तेरा ये प्रयास कड़ा,
तू दिव्य है, तू अचल है
क्रंदन छुपाकर जो खड़ा है
वह विचित्र है, असरल है
ऐ मदमस्त सुहाने गुलज़ार,
उज्जवल रवि, बरसती फुहार
सलाम है तेरे जूनून को।

जीवन के इस मार्ग पर,
ढोंग की भी बू मिलेगी,
कभी शराफ़ती शब्द होंगे,
तो कभी बेमानी थू मिलेगी,
तू पार्थ-कर्ण सा वीर बन,
खा ठोकर, नकार सभी को,
लक्ष्यभेदी तू तीर बन
ऐ हठी, शूर, विक्रांत,
विनीत, निर्मल, दरिया शांत
सलाम है तेरे जूनून को|

अर्चित अग्रवाल

Junoon

Leave a comment

Junoon – Sports event for specially abled children is organised by NSS and sports council of Birla Institute of Technology and Science, Pilani (commonly known as BITS Pilani) .About 110 specially abled children from Delhi, Jaipur and other towns of Rajasthan participated in Junoon 2012. Participants included both boys and girls and they were of the age 8 – 22 years.

specialBITS has been encouraging sports and has been conducting BOSM, the annual sports event, since several decades. Junoon is a new attempt to provide a platform for motivated, specially abled children, the tagline being, One world, one dream.

I strongly support their initiative and wish NSS BITS Pilani a huge success.

तू दिव्य है, तू अचल है
क्रंदन छुपाकर जो खड़ा है
वह विचित्र है, असरल है
ऐ मदमस्त सुहाने गुलज़ार,
उज्जवल रवि, बरसती फुहार
सलाम है तेरे जूनून को।

अर्चित अग्रवाल

NSS BITS Pilani Website: http://www.nss-bits-pilani.org/

 

%d bloggers like this: