ज़बान

Leave a comment

स्कूलों में जब अध्यापक पचास मिनट चुप रहने को कहते थे तो ऐसा लगता था कि इससे गंदी कोई और सज़ा हो ही नहीं सकती। फिर यह चलन शुरू हुआ कि अगर अंग्रेज़ी के अलावा किसी और भाषा में बोला कुछ, तो डायरी में नोट चढ़ा दिया जाएगा जिसके डर से फिर हमने चुप रहना ही ठीक समझा क्योंकि कोई मज़ा नहीं था खेलते हुए, खाते हुए अंग्रेज़ी में बड़-बड़ करना। ऐसा लगता था कि कुछ कहीं अब भी रह गया मन के अन्दर जो बाहर नहीं आएगा जब तक अपनी भाषा में न बोल लें। अब इसी सज़ा को बड़े पैमाने पर देखते हैं। स्कूल में तो पता था कि २ बजे के बाद कोई रोक-टोक नहीं होगी पर सोचिये क्या बीतती होगी उस आदमी पे जो विलायत गया हो कुछ पैसे कमाने और उसे वहाँ कोई हमज़बान न मिले। ये तो जीवन भर की सज़ा हो गई न?

कोई न था एक ही मुल्क का,
न ही कोई हमज़बान जिसे बता सके खुलकर
कि आज पहला शब्द बोला था उसके बेटे ने फोन पर,
या तेज़ सर्दी के कारण माँ के पैरों पर चकत्ते हो गए हैं।
छोटे भाई की डिग्री पूरी हुई है
और बालकनी का छज्जा गिर जाने से बेफिज़ूल का ख़र्चा बढ़ गया है।

पिछले चार बरस से घुट-घुट कर 
इतना तंग हो चूका था शायद कि जब
कमर सीधी कर थोड़ा सुस्ताना चाहा
तो बेआवाज़, गुप्तता में,
वो मिट्टी ओढ़कर सो गया।

अब क्या पता खुदा भी उसकी ज़बान जानता होगा या नहीं।। 

 

अर्चित अग्रवाल

रात

1 Comment

रातों की तुलना अक्सर अँधेरे से की जाती है और जिस तरह अँधेरे से सब दूर रहना चाहते हैं, लोग रात को भी नज़रंदाज़ करते हैं। अगर कभी कोई रात को सकारात्मक तरीके से सोचे भी तो उसमें प्रेम के कण ज़्यादा दिखते हैं। मुझे लगता है कि इन सबमें हम छोटी-छोटी चीज़ों को अनदेखा कर रहे हैं। रात की ठंडी बयार, शीतल मिट्टी, चमकते जुगनू , मेंढक-मच्छरों की आवाजें कुदरत का ही हिस्सा हैं। ये कविता पाठक को अपने डब्बे से बंद कमरों से बाहर निकलकर इन मामूली चीज़ों का मज़ा लेने को कहती है और अगर किसी को लगता है कि रात को अकेले ही रहना चाहिए तो मेरी नज़र में तो आप एक अलग ही स्तर पर गलत हैं।

एक बात यूँ छुपाई गई है,
कल रात तारों की आढ़ में
सूरज चोरी हुआ है।

 

रात भर फड़फड़ाते पत्ते,
मस्ती में डोल रहे थे,
मेंढक कहीं टर्राकर छिप जाते तो,
सीटियों से बहलाकर उनको,
झोंके कुछ-कुछ बोल रहे थे।
जो तुम्हें नींद की गोद में छोड़ आए,
ऐसा हर गीत ही तो लोरी हुआ है।
कल रात तारों की आढ़ में
सूरज चोरी हुआ है।।

 

क्या करेगा दीया जलाकर,
वो अँधेरा तो न निगल पाएगा,
क्यों घुसा पड़ा है एक डिब्बे में,
न सपने कहीं जाएँगे,
न नम स्पर्श से तू गल जाएगा।
‘गर ओस की एक बूँद तुम्हारी थकन मिटा दे,
तो वो ही गंगा, यमुना, कावेरी हुआ है।
कल रात तारों की आढ़ में
सूरज चोरी हुआ है।।

 


अर्चित अग्रवाल

सपने

Leave a comment

हर कोई ऊपर उठना चाहता है, सफल होना चाहता है पर मेरा मानना है कि हम सबके अंदर किसी एक चीज़ का डर है जो हमारी करनी और सोच के  बीच आता है। इस डर को दूर करने का छोटा सा प्रयास हमें अपने लक्ष्य के एक कदम और पास लेकर जा सकता है। उठिए, मेहनत कीजिए, सफलता आपका इंतज़ार कर रही है।

 

उस रात बड़ा ही सन्नाटा था
जब उछलकर चाँद छुआ और
कुछ सपनों के बदले हम
अपनी नींदों का सौदा कर आए। 

 

हर हार में जीत दिखी फिर,
सब डर अपना खोल दिया,
दबा पड़ा था मन में जो,
हवाओं से सब बोल दिया।
नियमों से बहुत ऊब चुके तो,
बेख़ौफ़ वज़ीर को प्यादा कर आए।
उस रात बड़ा ही सन्नाटा था जब
कुछ सपनों के बदले हम
अपनी नींदों का सौदा कर आए।

 

-अर्चित अग्रवाल

पेशावर

1 Comment

पेशावर में हुए आतंकी हमले को भुला देना नामुमकिन है। आतंकी वीर समझते हैं खुद को पर धिक्कार है उन कायरों पर, मूर्खों पर जो इतना गिर गए कि सियासती समस्या सुलझाने का इससे बेहतर कोई उपाय न सोच सके। दिन दिहाड़े 132 बच्चों की हत्या कर दहशतगर्दों ने सैंकड़ों सगे-सम्बन्धियों के सपने चूर किए हैं। सोचो क्या बीती होगी उस माँ पर, उस पिता पर जिसकी पाँच साल की बेटी, खोला अल्ताफ़, दूसरे ही दिन स्कूल से वापस न आ सकी। यकीनन चोटी बाँधकर, इस्त्री किए हुए कपड़े पहनकर एकदम सज बनकर गई होगी वो पढ़ने… जाती भी क्यों न? आखिर पिता ने कहा था कि ख़ूब ऊपर बढ़ना है उसे।

हर कोई बस हैरान है,
जो अब मदरसे में शमशान है,
जाने कितने पत्थर दिल होंगे,
कितने बुझदिल, कायर होंगे
जो बलिश्त-भर की काया भूनकर,
ग़रूर से फूल गए हैं।
आज बच्चे स्कूल गए हैं।।

कर तैयार सितारे अपने,
सवेरे भेजे थे वो शान से,
ख़ूब पढ़ेगा लाडला,
छोटे से इस अरमान से।
शान्ति उस माँ के नयनों को जो
इंतज़ार में दर-चौर पर झूल गए हैं।
आज बच्चे स्कूल गए हैं।।

मेला लगा है शहर में,
और आँगन में झूला बाँधा है,
मोटर-गाड़ी पास है फिर भी
सवारी में पिता का कांधा है।
शान्ति उस हर आह-आँसू को जो
मानते हैं कि, वे बस रस्ता भूल गए हैं।
आज बच्चे स्कूल गए हैं।।

-अर्चित अग्रवाल 

Older Entries

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 838 other followers

%d bloggers like this: